रूस पर लगा 4 साल का बैन, टोक्यो ओलिंपिक में खुल सकती है भारत की किस्मत

नई दिल्ली. डोपिंग (Doping) के चलते रूस को चार साल के लिए बैन कर दिया गया है. इसका मतलब अगले चार साल तक रूस की टीम ग्लोबल स्पोर्ट्स में हिस्सा नहीं लेगी. किसी भी इवेंट में न तो रूस का झंडा दिखाई देगा और न ही उस देश का राष्ट्रगान सुनाई देगा. बैन के चलते रूस टोक्यो ओलिंपिक और 2022 बीजिंग विंटर ओलिंपिक (2022 Beijing Winter Olympic) में भी हिस्सा नहीं ले पाएगा, जो खेल जगत के लिए एक बड़ा झटका तो है ही, लेकिन इससे ओलिंपिक में कई खिलाड़ियों का रास्ता भी आसान होगा. वाडा ने रूस पर एक डोपिंगरोधी प्रयोगशाला से गलत आंकड़े देने के आरोप लगाए. वाडा की लुसाने में कार्यकारी समिति की बैठक में यह फैसला किया गया. इस फैसले के बाद भी जो रूसी एथलीट डोपिंग से दूर हैं, वे अगले 4 साल के दौरान बिना रूस के झंडे और राष्ट्रगान के अंतरराष्ट्रीय खेलों में भाग ले सकते हैं.
पिछले 6 ओलिंपिक में जीते 546 मेडल खेल जगत में रूस सबसे बड़ी ताकत में से एक है. वैसे ओलिंपिक में इस देश का इतिहास काफी पुराना है, लेकिन अगर इसके 20 सालों का रिकॉर्ड देखा जाए तो इस देश के खिलाड़ियों ने पूरी दुनिया में अपना डंका बजाया. रूस ने ओलिंपिक में 546 मेडल जीते हैं. ओलिंपिक में रूस ने अभी तक 195 गोल्ड, 163 सिल्वर और 188 ब्रॉन्ज मेडल जीते हैं. छह ओलिंपिक में रूस ने 428 मेडल समर ओलिंपिक में और 120 मेडल विंटर ओलिंपिक में जीते हैं. 1996 से लेकर 2016 तक रूस शीर्ष चार में ही रहा.
रेसलिंग रूस की सबसे बड़ी ताकत
रूस के पहलवान ओलिंपिक में सबसे हावी रहते हैं. रेसलिंग में रूस ने 2016 तक कुल 56 मेडल जीते, जिसमें 30 गोल्ड, 11 सिल्वर और 15 ब्रॉन्ज मेडल जीते. रेसलिंग के बाद जिम्नास्टिक्स, एथलेटिक्स, फेंसिंग और बॉक्सिंग मेें भी रूस के खिलाड़ियों का ही दबदबा है. ऐसे में इन खेलों में रूस के न उतरने के बाद बाकी देशों के उन खिलाड़ियों को फायदा जरूर होगा, जिनका अभी तक ओलिंपिक का सफर रशियन खिलाड़ियों ने रोका. बॉक्सिंग में रूस ने कुल 30 मेडल जीते हैं, जिसमें 10 गोल्ड, 5 सिल्वर और 15 ब्रॉन्ज मेडल शामिल है.
भारत के खिलाड़ियों की खुल सकती है किस्मतओलिंपिक में उतरने के लिए हर खिलाड़ी को क्वालीफाई करना पड़ता है. इसी वजह से यहां आने वाला हर एक खिलाड़ी मजबूत चुनौती पेश करता है. लेकिन इसके बावजूद कुछ खिलाड़ी अपनी तकनीक और अनुभव से विपक्षी खिलाड़ी की चुनौती को आसानी से ध्वस्त करते हैं. कुछ ऐसा ही भारतीय पहलवान और रशियन पहलवानों के साथ है. ओलिंपिक में कई बार भारत की उम्मीदों को रूस के खिलाड़ियों ने तोड़ा. लेकिन अब जब उनके टोक्यो ओलिंपिक में उतरने की संभावना काफी कम है तो इसका फायदा वहांं भारतीय पहलवानों को मिल सकता है. भारत ने ओलिंपिक के इतिहास में रेसलिंग में कुल पांच मेडल जीते हैं, जिसमें से एक सिल्वर और चार ब्रॉन्ज मेडल हैंं.
रशियन मेडलिस्ट का खेलना मुश्किल
अगर रूस पर लगा प्रतिबंध नहीं हटता है तो विश्व चैंपियन गाजीमुराद राशिदोव और रियो ओलिंपिक के स्वर्ण पदक विजेता सोसलन रामानोव का खेलना मुश्किल हो जाएगा. ओलिंपिक में खेलने के लिए उन्हें युनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग और इंटरनेशनल ओलिंपिक कमेटी से अनुमति लेनी होगी. अगर उन्हें यह अनुमति नहीं मिलती है, तो वह ओलिंपिक में नहीं खेल पाएंगे.
बजरंग भारत की सबसे बड़ी उम्मीद टोक्यो ओलिंपिक में भारत की सबसे बड़ी उम्मीद बजरंग पूनिया हैं. हालांकि ओलिंपिक का खिताब जीतने के लिए बजरंग को अभी भी काफी मेहनत करनी होगी. लेकिन रूस के नहीं खेलने से उनकी राह कुछ आसान हो सकती है. पिछले साल कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने के अलावा बजरंग ने विश्व चैंपियनशिप में भी रजत पदक जीता. इसके साथ ही 65 किलोग्राम भार वर्ग में वह दुनिया के नंबर एक पहलवान बने. इस साल विश्व चैंपियनशिप में भी वह सेमीफाइनल में पहुंच गए थे, जहां उन्हें विवादित फैसले के बाद हार झेलनी पड़ी. मगर इस निराशा को पीछे छोड़ते हुए उन्होंने कांस्य पदक जीता.
रवि कुमार से भी मेडल की संभावना बढ़ी इसी तरह 57 किलोग्राम भार वर्ग में रवि कुमार दहिया (Ravi Kumar Dahiya) के ओलिंपिक पदक जीतने की संभावनाएं भी बढ़ जाएंगी. विश्व चैंपियनशिप में डेब्यू करते हुए रवि ने ब्रॉन्ज मेडल जीता था. हालांकि विश्व चैंपियनशिप में उन्हें खिताब का दावेदार माना जा रहा था, लेकिन रूस के उर उगायफ से करीबी मुकाबला गंवाने के बाद उनका खिताब जीतने का सपना भी टूट गया था. रशियन खिलाड़ी ने इस चैंपियनशिप का खिताब जीता था. अगर उगायफ ओलिंपिक में नहीं उतर पाते हैं तो रवि कुमार इसका फायदा उठा सकते हैं. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देखें तो सबसे बड़ा नुकसान 97 किलोग्राम में होगा, क्योंकि मौजूदा पीढ़ी के सर्वश्रेष्ठ पहलवान माने जाने वाले अब्दुल रशीद सादुलेव ओलिंपिक में नहीं खेल पाएंगे. इस साल हुए विश्च चैंपियनशिप में रूस की टीम 9 गोल्ड, 5 सिल्वर और 5 ब्रॉन्ज सहित कुल 19 मेडल के साथ टॉप पर रही थी.
बॉक्सिंग में भी भारत की उम्मीद बढ़ी
रूस के बाहर होने का फायदा भारतीय मुक्केबाजों को भी मिल सकता है. अगर इलिया पोपोव नहीं खेलते हैं, तो इसका फायदा मनीष कौशिक को हो सकता है. वहीं 2012 लंदन ओलिंपिक की मेडलिस्ट मैरीकॉम (Mary Kom) को भी लिलिया ऐतबाएवा की अनुपस्थिति का लाभ मिल सकता है. निशानेबाजी में सर्गे कैमिनस्की का खेलना संदिग्ध है.
रियो में रशियन पहलवानों ने तोड़ी थी भारतीय उम्मीद रशियन और भारतीय पहलवानों के बीच अक्सर ही कांटे का मुकाबला देखने को मिलता है. हालांकि इनमें ज्यादातर रशियन पहलवान ही बाजी मारते है. लेकिन 2010 में भारत के दिग्गज पहलवान और दो बार के ओलिंपिक मेडलिस्ट सुशील कुमार ने वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में रूस के एलन गोवेव को हराकर खिताब जीता था. वे विश्व चैंपियन बनने वाले पहले पहलवान थे. वहीं 2012 लंदन ओलिंपिक में योगेश्वर दत्त (Yogeshwar Dutt) का गोल्ड जीतने का सफर रशियन खिलाड़ी ने ही तोड़ा था. 60 किग्रा भार वर्ग में प्री क्वार्टर फाइनल में रूस के बेसी ने मात देकर उन्हें बाहर कर दिया था. लेकिन योगेश्वर दत्त किस्मत वाले रहे कि उन्हें रेपेचेज खेलने का मौका मिला. वहां उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया.
ओलिंपिक में मेडल जीतने वाली पहली महिला पहलवान साक्षी मलिक ने 2016 में रियो ओलिंपिक में अपने सफर की शानदार शुरुआत करते हुए 58 किग्रा के क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया था, जहां रूस की वलरिया कोबलोवा ने उन्हें हरा दिया था. हालांकि रशियन खिलाड़ी के फाइनल में पहुंचने से साक्षी को रेपेचेज खेलने का मौका मिल गया और यहां उन्होंने बाजी मार के इतिहास रच दिया.
रशियन खिलाड़ियों के पास अभी भी मौका डोपिंग (Doping) के चलते रूस को बैन किया गया, लेकिन रशियन खिलाड़ियों की उम्मीदें नहीं टूटी है, क्योंकि उनके पास ओलिंपिक में चुनौती पेश करने का अभी एक रास्ता बचा हुआ है. रूस के जिन खिलाड़ियों का नाम डाेपिंग करने वाले खिलाड़ियों की लिस्ट में नहीं हैं, वे आवेदन कर सकते हैं. अगर उन्हें खेलने की अनुमति मिल जाती है तो उन्हें ओलिंपिक के झंडे तले खेलना होगा. ऐसे में भारत के इन खिलाड़ियों को रशियन खिलाड़ियों की चुनौती का डटकर जवाब देना होगा.


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